चार बहिनें बढ़ा रही उत्तराखंड पुलिस का मान।
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विनय उनियाल
हल्द्वानी : नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं। उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ समय में काफी जोर दिया गया है। लेकिन असली महिला सशक्तिकरण तब होता है, जब महिलाएं खुद आगे बढ़कर नाम बनाती हैं। उत्तराखंड पुलिस में तैनात चार कॉप सिस्टर्स की कहानी वाकई प्रेरणादायक है। यह चार बहनें कभी भी हार ना मानने और आगे बढ़ने की बड़ी मिसाल पेश कर रही हैं। नवरात्र के मौके पर उत्तराखंड पुलिस ने फेसबक पर इन बेटियों की कामयाबी को साझा किया है।
बता दें कि मानिला अल्मोड़ा निवासी इन बहनों का मायका कैंट एरिया बरेली में है। स्वर्गीय रूप सिंह (आर्मी से सेवानिवृत्त) की 4 बेटियां आज उत्तराखंड पुलिस में अपनी सेवाएं दे रही हैं। जहां पिता सेना में थे, वही मां लीला घुघत्याल ग्रहणी हैं। एक बेटा और पांच बेटियों में चार बहनें इस वक्त उत्तराखंड पुलिस में तैनात होकर प्रदेश की रक्षा कर रही हैं। इन बेटियों की कहानी में पिता ही उनके सबसे बड़े हीरो रहे हैं।
मौजूदा वक्त की बात करें तो जानकी बोरा नरेंद्र नगर में हेड कांस्टेबल की ट्रेनिंग ले रही हैं। तो वहीं अंजलि भंडारी पीएसी में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। कुमकुम धनिक डीआईजी रेंज कार्यालय हल्द्वानी में हैं जबकि गोल्डी घुघत्याल उधम सिंह नगर में उप निरीक्षक के पद पर सेवाएं दे रही हैं। खाकी वर्दी पहनकर यह चारों बहनें महिला सशक्तिकरण का नारा बुलंद कर रही हैं।
बता दें कि बड़ी बेटी जानकी बोरा बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही बतौर सिपाही पुलिस में भर्ती हो गई थी। जानकी को यह भर्ती 1997 में मिली थी। तीसरे नंबर की बेटी कुमकुम वर्ष 2002 में सिपाही बनीं। जबकि 2005 में अंजलि भंडारी भी सिपाही बन गई। सबसे छोटी बहन गोल्डी ने तो सबको हो पीछे छोड़ दिया। गोल्डी साल 2015 में सीधे दरोगा बन गई।
बता दें कि दरोगा कुमकुम सोशल मीडिया पर भी खासा पॉपुलर हैं। वह ज़ी टीवी के सुपरमॉम शो में भी आ चुकी हैं।
टीवी राउंड तक पहुंचकर सैकड़ों दर्शकों का दिल भी जीत चुकी हैं। हो ना हों लेकिन इन चार बेटियों की मेहनत और लगन के बूते ही आज हर जगह इनकी चर्चा हो रही है। लाजमी है कि बेटियों को यहां तक पहुंचाने के लिए स्वर्गीय पिता ने भी प्रेरणादायक फैसले लिए होंगे।

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