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October 9, 2026

घराट

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तुंगनाथ धाम में 1.18 लाख श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड, पर्यटन कारोबार हुआ गुलजार

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बाबा तुंगनाथ की महिमा से बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल.

रुद्रप्रयाग: हिमालय की मनोरम वादियों में समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम इस वर्ष आस्था का नया केंद्र बनकर उभरा है. यात्रा सत्र में अब तक 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं. यह संख्या न केवल पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है, बल्कि धाम के प्रति देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बढ़ते विश्वास और आकर्षण को भी दर्शाती है.

21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. चोपता से तुंगनाथ तक का पैदल मार्ग इन दिनों भक्तों से गुलजार है. सुहावना मौसम, हिमालय की बर्फाच्छादित चोटियों का मनमोहक दृश्य और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के लिए इस यात्रा को अविस्मरणीय बना रहे हैं.बढ़ती यात्री संख्या का सकारात्मक प्रभाव पूरे तुंगनाथ घाटी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है. चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा सहित आसपास के क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, स्थानीय दुकानें, घोड़ा-खच्चर सेवा और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

स्थानीय युवाओं को भी रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं.यात्रा को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित समाज, वन विभाग, व्यापार संघ और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं संयुक्त रूप से सुरक्षा, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं पर लगातार कार्य कर रही हैं. यही कारण है कि धाम में श्रद्धालुओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. शिक्षाविद् धीर सिंह नेगी का कहना है कि यदि तुंगनाथ क्षेत्र में पार्किंग, शौचालय, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए, तो यह क्षेत्र वर्षभर धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन सकता है.

तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित के अनुसार, कपाट खुलने के बाद से अब तक 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी पर्यटक समेत कुल 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है. लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या यह संकेत दे रही है कि तृतीय केदार तुंगनाथ धाम अब केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उभरते आध्यात्मिक और पर्वतीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर चुका है.

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