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June 19, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

मसूरी – जाम से नहीं मिल पर रहा छुटकारा, पुलिस व्यवस्था चरमरायी।

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मसूरी : पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण स्थानीय लोगों सहित पर्यअकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे आश्चर्य जनक बात तो यह है कि मालरोड पर जाम लग रहा है।
पर्यटन नगरी मसूरी में जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रहा है। मुख्य मार्गों पर तो जाम हर रोज लग ही रहा है लेकिन मालरोड भी जाम से जूझ रहा है। लाइब्रेरी चैक पर वाहनों के जाम लगने से लाइब्रेरी क्षेत्र के मालरोड पर जाम लगना आम बात हो गई है। और यह जाम गढवाल टैरेस तक लग रहा है। इसके साथ ही मालरोड पर रियाल्टो चैक, क्लार्क चैक व कुलड़ी की चढाई के साथ पिक्चर पैलेस बैरियर पर जाम लगने से लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही मुख्य मार्ग लाइब्रेरी से अकादमी मार्ग, मोती लाल नेहरू मार्ग, लाइब्रेरी से किंक्रेग मार्ग पर जाम लगना तो एक आम बात हो गई है।

लेकिन सबसे अधिक परेशानी लंढौर गुरूद्वारा चैक से मलिंगार व घंटाघर पर ऐसा जाम लगता है कि उसे खुलवाने में ही घंटो लग जाते हैं। क्यों कि सड़क संकरी होने के कारण वाहनों का निकलना कठिन हो जाती है। इसमें सबसे बड़ी कमी पुलिस प्रशासन की नजर आती है। क्योंकि पुलिस की कमी के कारण ही व्यवस्था बनाने में परेशानी हो रही है। जो पुलिस है वह केवल गांधी चैक पर ही तैनात रहती है बाकी शहर को लावारिस छोड दिया गया है। वहीं जो व्यवस्थाएं पुलिस ने बनायी है उन पर भी अमल नहीं किया जा रहा है। पूर्व में कई बार यातायात व्यवस्था को सुधारने की बातें बैठकों में आती रहती हैं लेकिन यह केवल बैठकों तक ही सीमित रह जाती हैं। जिन मार्गो पर एक मार्गीय यातायात की व्यवस्था की गई है वहां पर भी इसका सही तरीके से पालन नहीं किया जाता है। व कई बार पुलिस से आंख बचाकर या जानकारी के अभाव में पर्यटक वाहन एक मार्गीय यातायात व्यवस्था की विपरीत दिशा में आ जाते हैं। जिसके कारण जाम लग जाता है। मलिंगार चैक पर लाल टिब्बा से वापस लौटने वाले वाहनों को टिहरी मार्ग से टिहरी बाईपास की ओर डायबर्ट किया जाता है लेकिन यह व्यवस्था शाम को पांच बजे के बाद ध्वस्त हो जाती है क्योंकि उसके बाद वहां से पुलिस कर्मी चले जाते हैं जिसके कारण पर्यटकों के वाहन मलिंगार से लंढौर बाजार की ओर आ जाते है जिस कारण इतना जाम लग जाता है कि उसे खुलवाने में ही घंटो लग जाते हैं। कई बार इस मार्ग पर एंबुलेंस भी फंस जाती है। ऐसे में दोष व्यवस्था का ही नजर आता है। जब तक सख्ती से नियम लागू नहीं किए जायेंगे तब तक व्यवस्था में सुधार आना कठिन है।

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