भोग और मोक्ष प्रदान कराने वाली भगवती राजराजेश्वरी देवी का ४७वां पाटोत्सव सम्पन्न।
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विनय उनियाल
जोशीमठ : ज्योतिर्मठ की अधिष्ठात्री देवी राजराजेश्वरी त्रिपुरसुन्दरी माता श्रीदेवी जी का पाटोत्सव सम्पन्न हुआ आज। ध्यातव्य हो कि सन् 1973 में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य बनने के बाद पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने परम्परानुसार पूजित भगवती के श्रीविग्रह की प्रतिष्ठा की थी तब से प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी को ज्योतिष्पीठ के भक्तगण पाटोत्सव मनाते आ रहे हैं।
प्रातः भगवती की महापूजा, श्रृंगार और महाआरती सम्पन्न हुई। देवी को एक हजार ऋतुफल समर्पित किए गए। आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ।
कार्यक्रम ज्योतिष्पीठ के प्रतिनिधि पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज के निर्देशानुसार सम्पन्न हुए। ज्योतिर्मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुन्दानन्द ने बताया कि कलयुग में देवी की आराधना ही समस्त मनोकामनाओं की सिद्धि प्रदान करने वाला है इसलिए अपने ऐहिक और आमुष्मिक कल्याण की कामना वाले प्रत्येक व्यक्ति को सदा गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने देवी आराधना करनी चाहिए।
आज के कार्यक्रम में मुख्यरूप से उपस्थित रहे दण्डी स्वामी प्रज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज, ब्रह्मचारी विष्णुप्रियानन्द, हरीश डिमरी , भगवतीप्रसाद नम्बूरी , वाणी विलास डिमरी, अरविन्द पंत, महिमानन्द उनियाल, जगदीश उनियाल , अभिषेक बहुगुणा, आशीष उनियाल आदि मौजूद रहे।

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