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November 5, 2026

घराट

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उत्तराखंड कांग्रेस में SIR को लेकर हलचल, कंट्रोल रूम में डटी अधिवक्ताओं की फौज, क्या सता रहा डर?

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उत्तराखंड में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत 19 लाख से ज्यादा वोटरों को नोटिस, कांग्रेस ने बिठाई अधिवक्ताओं की फौज, जानिए क्यों?

देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. स्थिति ये है कि पार्टी ने अपने महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है और कंट्रोल रूम तैयार कर यहां अधिवक्ताओं की भी फौज बैठा दी है. मामला एसआईआर (SIR) के दौरान गड़बड़ी की आशंका से जुड़ा है. जिसके लिए प्रदेश भर में पार्टी कार्यकर्ताओं को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं.

बता दें कि उत्तराखंड में इन दिनों SIR पर निर्वाचन आयोग जोर शोर से काम कर रहा है. तमाम जिलों को भी इसके लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं और इस काम के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है, लेकिन इस सब के बीच विपक्षी दल कांग्रेस की कुछ आशंकाओं ने उसे अलर्ट मोड पर ला दिया है. पार्टी के लिए यह आशंकाएं उन नोटिस से शुरू हुई है, जो बड़ी संख्या में प्रदेशवासियों को आयोग की तरफ से दिए गए हैं.

19 लाख से ज्यादा वोटरों को नोटिस जारी: मामला एसआईआर (SIR) के दौरान लोगों के वेरिफिकेशन का है, जिसमें 19 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. जाहिर है कि करीब 70 लाख वोटर्स वाले उत्तराखंड में 19 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस जाना सभी को चौंका रहा है. यही हाल विपक्षी दल कांग्रेस का भी है. जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में नोटिस सर्व होने की खबर के बाद अपने तमाम कार्यक्रमों को स्थगित कर SIR पर ही पूरा फोकस करने का फैसला लिया है.

कांग्रेस ने स्थगित किए अपने कार्यक्रम: दरअसल, हाल ही में परिवर्तन रैली के जरिए राज्य में सरकार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन होना था. करीब चार दिनों तक चलने वाले इस प्रदर्शन के जरिए सरकार की नीतियों और फसलों पर आम लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की जानी थी, लेकिन पार्टी ने फिलहाल SIR में लोगों की बढ़ती समस्याएं और गड़बड़ी की संभावनाओं को देखते हुए अपने इन कार्यक्रमों को स्थगित किया है.

कांग्रेस के कंट्रोल रूप में 18 अधिवक्ताओं की तैनाती: बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. क्योंकि, कांग्रेस ने इसके लिए एक कंट्रोल रूम को भी स्थापित कर दिया है. जहां करीब 18 अधिवक्ताओं की टीम लगाई गई है, जो कि SIR पर कानूनी पहलुओं को देखेगी और आम लोगों को दिए जाने वाले नोटिस पर उनकी सहायता भी करेगी.

इतना ही नहीं पार्टी अंदरुनी रूप से ये भी देखने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार निर्वाचन आयोग ने जो नोटिस दिए हैं, वो किन क्षेत्रों के हैं और इसमें ज्यादातर किन लोगों को रखा गया है. कुल मिलाकर पार्टी आंतरिक रूप से नोटिस के पीछे के कारणों को जानने में लग गई है. क्योंकि, पार्टी को आशंका है कि सरकार निर्वाचन आयोग के जरिए SIR के दौरान वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी कर सकती है. इसी को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट कहते हैं कि,

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर कांग्रेस अलर्ट: कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए राज्य स्तर पर अलग-अलग जिलों को आयोग की इन प्रक्रियाओं को देखने और वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने देने के निर्देश दिए हैं. जबकि, वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने की संभावना होने पर तत्काल इसकी सूचना प्रदेश स्तर के नेताओं को देने के भी निर्देश हुए हैं.

नोटिस मिलने से वोटर परेशान: उधर, दिल्ली स्तर पर भी ऑनलाइन रूप से लगातार बात की जा रही है और दिल्ली से SIR से जुड़े एक्सपर्ट भी प्रदेश के नेताओं के संपर्क में है. इधर, दूसरी तरफ राज्य में रहने वाले तमाम लोग जिनको नोटिस दिए हैं, वो भी परेशान होते हुए दिखाई दिए हैं. स्थानीय निवासी आदित्य बिष्ट का कहना है कि,

गौर हो कि हाल में ही कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की थी. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की खामियों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा था.

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