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October 20, 2026

घराट

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उत्तराखंड की ऑर्गेनिक चाय ने बनाई नई पहचान, 1600 हेक्टेयर में विकसित किया चाय बागान, 4200 लोगों को मिला रोजगार

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उत्तराखंड की ऑर्गेनिक चाय की मार्केट में भारी मांग रही है. एक बार फिर यहां की चाय अपनी नई पहचान बना रही है.

रामनगर: उत्तराखंड में सरकार चाय उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. प्रदेश में चाय विकास बोर्ड के गठन के बाद चाय उत्पादन को एक नई दिशा मिल रही है. वहीं चाय उत्पादन ने पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं. उत्तराखंड टी बोर्ड के अनुसार करीब 4200 लोगों को चाय उत्पादन से रोजगार मिला है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार व आर्थिकी मजबूत होने के साथ ही पलायन रोकने में भी मदद मिल रही है.

वहीं, टी बोर्ड ने करीब 3800 काश्तकारों की भूमि लीज पर लेकर चाय उत्पादन को बढ़ावा दिया है. अब चाय के बागानों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. टी टूरिज्म के तहत पर्यटकों को चाय बागानों की प्राकृतिक खूबसूरती और चाय उत्पादन की प्रक्रिया से रूबरू कराया जा रहा है. उत्तराखंड की पहाड़ियों में तैयार हो रही ऑर्गेनिक चाय अब रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन तीनों को मजबूत करने का जरिया बन रही है. आने वाले समय में चाय उत्पादन का विस्तार प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है.

सरकार की ओर से प्रदेश में करीब 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित किए जा चुके हैं. इसके साथ ही पांच चाय फैक्ट्रियां स्थापित की गई हैं. प्रदेश में वर्षभर करीब 9 लाख किलो हरी चाय की पत्तियों का चुगान किया जा रहा है, जिसमें लगभग 2 लाख किलो ऑर्गेनिक चाय का उत्पादन होता है. चाय से करीब 4 करोड़ रुपये की आय अर्जित की जा रही है.
–अनिल खोलिया, उपनिदेशक, टी बोर्ड

उत्तराखंड में चाय उत्पादन का इतिहास करीब 190 वर्ष पुराना है. वर्ष 1835 में तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिक के कार्यकाल में कुमाऊं क्षेत्र में चाय की खेती की शुरुआत हुई थी. वर्ष 1850 तक कुमाऊं में 40 से अधिक चाय के बागान विकसित हो चुके थे. हालांकि वर्ष 1900 के बाद यहां चाय का उत्पादन लगभग बंद हो गया.

आजादी के बाद वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्वतीय जिलों में चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुमाऊं-गढ़वाल मंडल विकास निगम को चाय बागान विकसित करने की जिम्मेदारी दी. उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2004 में उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का गठन किया गया. इसके बाद पिछले दो दशकों में प्रदेश में चाय उत्पादन को नई दिशा मिली है.

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