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September 22, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

भगवान शिव का एक भक्त ऐसा भी, हादसे में गंवाया पैर और हाथ, शिवभक्ति ने दिया हौसला

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गौरव का जज्बा कांवड़ यात्रा में शामिल हजारों शिवभक्तों के लिए प्रेरणा और संदेश है. संकल्प मजबूत है तो हर बाधा छोटी हो जाती है.

हरिद्वार: कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती. इस कहावत को हापुड़ निवासी 29 वर्षीय गौरव शर्मा ने सच कर दिखाया है. साल 2013 में हुए सड़क हादसे में अपना बायां पैर गंवाने के बावजूद वह कृत्रिम पैर के सहारे लगातार दूसरी बार हरिद्वार से 21 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. हरकी पैड़ी पर उन्हें देखकर श्रद्धालु भी उनके जज्बे को सलाम करते नजर आए.

गौरव शर्मा ने बताया कि साल 2013 में उनके साथ सड़क हादसा हो गया था. सड़क हादसे में उनका बायां पैर और दायां हाथ में गंभीर चोटें आई और गंभीर रूप से रूप से घायल हो गए थे. लंबे उपचार के दौरान उनका बायां पैर दाया हाथ काटना पड़ा. बाद में कृत्रिम पैर लगाया गया. उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में चलना भी बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट आए.

गौरव का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा और आशीर्वाद ने उन्हें हर कठिन परिस्थिति से लड़ने का साहस दिया. इसी आस्था के बल पर वह लगातार दूसरी बार हरिद्वार से 21 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने बताया कि यह यात्रा वह अपने परिवार की सुख समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सभी के कल्याण की कामना के साथ कर रहे हैं.

कृत्रिम पैर के सहारे 21 लीटर गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करना आसान नहीं है, लेकिन गौरव पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि भोलेनाथ की कृपा से वह इस बार भी करीब आठ दिन में अपनी यात्रा पूरी कर लेंगे. हरकी पैड़ी पर अन्य श्रद्धालुओं और रास्ते में आमजन ने गौरव का उत्साहवर्धन किया और उनके साहस की सराहना की. कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं. गौरव ने कहा भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है. जब उनका आशीर्वाद साथ हो तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं लगती.

बता दें कि हरिद्वार से हापुड़ के बीच की दूरी करीब 230 किलोमीटर है और गौरव पैदल ही इस दूरी को तय करेंगे. गौरव शर्मा की यह यात्रा बताती है कि सच्ची आस्था, अटूट विश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं.

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