Categories

July 10, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

उत्तराखंड में मानसून का कहर, सड़कें बनीं दरिया, जान जोखिम में डालकर नाला पार कर रहे लोग

1 min read

उत्तरकाशी में भारी बारिश लोगों पर आफत बनकर टूट रही है. भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं.

उत्तरकाशी: मानसून की शुरुआत के साथ ही मोरी विकासखंड की बड़ासु पट्टी के दूरस्थ गांवों के सामने एक बार फिर संपर्क संकट गहरा गया है सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग पर हलारा और पूर्ति खड्ड में जलस्तर बढ़ने से सड़क पर तेज बहाव आ गया है. हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों और ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर इन उफनते खड्डों को पार करना पड़ रहा है. यदि लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा तो पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका समेत पांच गांवों का संपर्क मोरी विकासखंड मुख्यालय से पूरी तरह कटने की आशंका है.

ग्रामीणों के अनुसार दोनों खड्डों पर पुल नहीं होने के कारण हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है. इस बार भी मानसून की पहली बारिश के साथ ही खड्ड उफान पर हैं. तेज बहाव के बीच दोपहिया वाहन निकालने के लिए पांच से दस लोगों की मदद लेनी पड़ रही है, जबकि चारपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के बहने का खतरा लगातार बना हुआ है. कई लोग जरूरी कार्यों के लिए जोखिम उठाकर आवाजाही कर रहे हैं.

स्थानीय निवासी नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह ने बताया कि बरसात शुरू होते ही क्षेत्र का संपर्क देश-दुनिया से लगभग कट जाता है. उन्होंने कहा कि हलारा और पूर्ति खड्ड वर्षों से ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं. हर साल पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्ग की मांग उठाई जाती है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. इसका खामियाजा हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि इस समय क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी नगदी फसलों की तैयारियां चल रही हैं.

मोरी क्षेत्र की समस्या की जानकारी मिलने के बाद पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. बरसात के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सड़क पर आवाजाही यथासंभव सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा आपदा मद से आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित करने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने को भी कहा गया है.
-प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी

आने वाले दिनों में इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना होगा, लेकिन यदि सड़क इसी तरह बाधित रही तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. साथ ही बीमार मरीजों, स्कूली बच्चों और आवश्यक सेवाओं के आवागमन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. ग्रामीणों ने बताया कि कई बार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिकारियों से दोनों खड्डों पर स्थायी पुल निर्माण और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं. उनका कहना है कि हर मानसून में यही समस्या दोहराई जाती है और प्रशासन अस्थायी व्यवस्था तक ही सीमित रह जाता है.

कहा कि अस्थायी इंतजामों से समस्या का समाधान संभव नहीं है. उनका कहना है कि जब तक हलारा और पूर्ति खड्ड पर स्थायी पुलों का निर्माण नहीं होता, तब तक हर मानसून में पांच गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा और क्षेत्र का विकास भी बाधित होता रहेगा.

रुद्रप्रयाग में स्कूलों में अवकाश घोषित: रुद्रप्रयाग में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जनपद के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है. वहीं, अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन ने लोगों से नदियों, गदेरों एवं बरसाती नालों के समीप न जाने की सख्त अपील की है.

Spread the love

You may have missed