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August 26, 2026

घराट

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Harish Rawat Interview: दल-बदल से आ रही अस्थिरता राज्य के लिए ठीक नहीं, हरदा ने चुनाव से दूरी की बताई वजह

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की मौजूदा राजनीति पर चिंता जताते हुए कहा कि दल-बदल की प्रवृत्ति राज्य में अस्थिरता को बढ़ा रही है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। एक साक्षात्कार में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी समय में अन्य दलों में टूट-फूट की शुरुआत भाजपा ने की, जिसे अब उसने अपनी रणनीति बना लिया है।

उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से नेताओं को तोड़कर लाना और उन्हें प्रमुखता देना आम हो गया है, चाहे उन पर गंभीर आरोप ही क्यों न हों। भाजपा में शामिल होने के बाद ऐसे नेताओं की छवि अचानक साफ दिखाई देने लगती है।

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर रावत ने बताया कि पार्टी के पांच प्रमुख नेता—गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और करन माहरा—मिलकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने खुद को सहयोगी भूमिका में बताते हुए कहा कि जब टीम तैयार है, तो उन्होंने थोड़ा पीछे हटना ही बेहतर समझा।

राजनीतिक अवकाश के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं पार्टी में नेतृत्व स्पष्ट रूप से सामने आए। यदि वे खुद आगे रहेंगे तो भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसलिए उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का निर्णय लिया, हालांकि पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि दल-बदल के कारण असली मुद्दे दब जाते हैं और जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने भी चार महीने तक दल-बदल की मार झेली और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी, जिसके बाद सरकार बहाल हुई।

रावत ने यह भी कहा कि वह अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय अनुभव को आने वाली पीढ़ी के लिए संजोना चाहते हैं। इसके लिए वह अपने अनुभवों को लिखित रूप में संरक्षित करने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति और पहचान को आगे बढ़ाना है।

युवाओं को लेकर उन्होंने चिंता जताई कि उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। विधानसभा के सीमित सत्रों के कारण प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी क्षमता दिखाने का मौका नहीं मिल पाता, जिससे राज्य को नुकसान हो रहा है।

परिवारवाद के सवाल पर रावत ने कहा कि उन्होंने हमेशा अन्य लोगों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने अपने बेटे को भी कई बार चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया, बल्कि अन्य कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके बच्चे समर्थकों से जुड़े रहने में भूमिका निभा सकते हैं।

इस तरह रावत ने प्रदेश की राजनीति, संगठन की रणनीति और अपने भविष्य की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी।

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