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October 15, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

साइबर ठगी की शिकायत पर तुरंत मिलेगी मदद, 1930 हेल्पलाइन पर AI एजेंट करेगा मदद

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उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस साइबर ठगी रोकने पर लगातार काम कर रही है. जिससे लोगों को राहत मिल सके.

देहरादून: साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को अब राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस हेल्पलाइन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यवस्था का ट्रायल कर रही है. इसके जरिए एक साथ अधिक कॉल अटेंड करने,पीड़ितों से शुरुआती जानकारी जुटाने और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल यह सुविधा हिंदी और अंग्रेजी में परीक्षण के तौर पर शुरू की गई है.भविष्य में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी स्थानीय भाषाओं को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है.

AI एजेंट से कम होगा कॉल का दबाव: साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है. ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोकने के लिए पुलिस और संबंधित बैंक को जल्द कार्रवाई करनी पड़ती है. हालांकि, एक ही समय में बड़ी संख्या में कॉल आने और सीमित मैनपावर के कारण कई बार पीड़ितों को इंतजार करना पड़ता है.

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के मुताबिक

हेल्पलाइन की कुछ लाइनों को ट्रायल के तौर पर AI आधारित व्यवस्था से जोड़ा गया है. इसके तहत कॉल करने वाले व्यक्ति को शुरुआती प्रतिक्रिया और शिकायत दर्ज कराने के संबंध में मार्गदर्शन मिल सकेगा. व्यवस्था में AI और पुलिसकर्मियों, दोनों के माध्यम से कॉल अटेंड करने का प्रावधान रहेगा. इससे कॉल का दबाव बढ़ने पर भी अधिक लोगों तक मदद पहुंचाने में सहूलियत होगी.
-अजय सिंह,एसएसपी एसटीएफ-

शिकायत के बाद पुलिस करेगी संपर्क: नई व्यवस्था के तहत पीड़ित को फोन पर पूछी जाने वाली जरूरी जानकारी देनी होगी. शुरुआती जानकारी और शिकायत से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित संदेश भेजा जाएगा. जरूरत पड़ने पर पुलिस भी पीड़ित से संपर्क कर आगे की कार्रवाई में मदद करेगी. एसपी साइबर शांतनु पाराशर ने इस व्यवस्था का प्रदर्शन कर बताया कि हेल्पलाइन पर कॉल आने के बाद शिकायतकर्ता से किस तरह जानकारी ली जाएगी और प्रक्रिया पूरी होने पर उसे संदेश कैसे भेजा जाएगा. हालांकि, पीड़ित को राहत मिलने और रकम वापस मिलने का समय शिकायत की प्रकृति, उपलब्ध जानकारी और संबंधित बैंक की कार्रवाई पर निर्भर करेगा.

बैंक खातों में रकम होल्ड कराने पर रहेगा फोकस: एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया है कि AI का इस्तेमाल पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने और मैनपावर का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. शिकायत दर्ज करने और शुरुआती जानकारी जुटाने में कम समय लगने से पुलिसकर्मी बैंक खातों में ठगी की रकम होल्ड कराने, बैंकों से समन्वय स्थापित करने और शिकायतों पर आगे की कार्रवाई के लिए अधिक समय दे सकेंगे. हालांकि, AI खुद बैंक खाते में रकम होल्ड नहीं करेगा. इसके लिए पुलिस और संबंधित बैंक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी होगी.

डेटा सुरक्षा के लिए बनेगा अलग सर्वर: हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल में पीड़ितों की व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खातों से संबंधित संवेदनशील विवरण हो सकते हैं. ऐसे में डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरी व्यवस्था के लिए अलग सर्वर तैयार करने की योजना है.एसएसपी एसटीएफ के मुताबिक, AI व्यवस्था उपलब्ध कराने वाली कंपनी के साथ विधिवत समझौता किया जाएगा. इसमें कॉल से प्राप्त डेटा और संवेदनशील जानकारी को किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा होने से बचाने के प्रावधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा. साथ ही, निर्धारित अवधि के बाद गैर-जरूरी डेटा को हटाने की व्यवस्था भी बनाई जाएगी.

गढ़वाली-कुमाऊंनी में भी मिलेगी मदद: फिलहाल AI आधारित हेल्पलाइन हिंदी और अंग्रेजी में काम करेगी. भविष्य में कॉल की प्रकृति और लोगों की जरूरतों का अध्ययन करने के बाद स्थानीय भाषाओं को भी शामिल करने पर विचार किया जाएगा.जरूरत के अनुसार AI को गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी भाषाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकता है. इससे स्थानीय भाषा में अपनी समस्या बताने वाले लोगों को भी साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने और शुरुआती मार्गदर्शन प्राप्त करने में आसानी होगी.

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