Categories

September 12, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

3.5 लाख खिलाड़ियों का डाटा चोरी मामला, खेल विभाग ने दर्ज कराया मुकदमा, सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ने लगाया ये आरोप

1 min read

खेलो यूके पोर्टल विवाद खेल विभाग और सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ‘खेलो टेक इंडिया’ के बीच है, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है

देहरादून: उत्तराखंड खेल विभाग के विभागीय वेब पोर्टल से 3.5 लाख से अधिक खिलाड़ियों का डेटा चोरी होने की आशंका और एक्सेस ब्लॉक होने के मामले में पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया है. दूसरी तरफ सेवा प्रदाता कंपनी ‘खेलो टेक इंडिया’ ने बकाया भुगतान न होने और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

खेलो यूके पोर्टल विवाद: उत्तराखंड खेल विभाग के आधिकारिक वेब पोर्टल (kheloUK.org) के एडमिन क्रेडेंशियल्स और एक्सेस अधिकार बंद किए जाने के बाद, राज्य के खेल जगत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विभाग का आरोप है कि सेवा प्रदाता कंपनी ‘खेलो टेक इंडिया’ (Khelotech India) ने बिना किसी पूर्व सूचना या विभागीय अनुमति के पोर्टल के क्रेडेंशियल्स बदल दिए और एक्सेस रोक दिया.

खेल विभाग ने दर्ज कराया मुकदमा: खेल विभाग का कहना है कि इस वजह से आगामी खेल महाकुंभ और राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों के बीच करीब 3.5 लाख से अधिक पंजीकृत खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण डेटा और दस्तावेज फंस गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए खेल विभाग के उपनिदेशक की तहरीर पर पुलिस ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अंशुल बगई के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है. विभाग को यह भी आशंका है कि खिलाड़ियों का संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा और दस्तावेज लीक या चोरी हो सकते हैं.

विशेष खेल सचिव ने बताया क्यों पैदा हुई समस्या: इस पूरे घटनाक्रम पर विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा ने विभाग का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि-

पोर्टल के एडमिन क्रेडेंशियल्स में अनधिकृत बदलाव किए जाने के कारण व्यवस्था बाधित हुई है. हमारे विभागीय पोर्टल के एडमिन क्रेडेंशियल्स में बदलाव किया गया है. इसमें किसकी गड़बड़ी या खुराफात (Mischief) है, इसकी जांच की जा रही है. चूंकि खेल महाकुंभ और आगामी टूर्नामेंट्स का समय नजदीक था और इस बीच यह समस्या उत्पन्न हुई, इसलिए विभाग को मामले में एफआईआर (मुकदमा) दर्ज कराने का कदम उठाना पड़ा.
-अमित सिन्हा, विशेष सचिव, खेल विभाग-

भुगतान के दावों की जांच हो रही: अमित सिन्हा ने कहा कि-

जहां तक कंपनी द्वारा बकाया भुगतान के दावों का सवाल है, तो विभाग इस संबंध में अनुबंध के नियमों और फाइलों का परीक्षण कराएगा. यदि कोई वैध भुगतान लंबित है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.
-अमित सिन्हा, विशेष खेल सचिव-

कंपनी ने लगाया भुगतान ना होने का आरोप: दूसरी ओर, खेलो टेक इंडिया के सीईओ अंशुल बगई ने विभाग के सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे भुगतान में देरी छुपाने की कोशिश बताया है. उन्होंने फोन पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि-

कंपनी पर डेटा चोरी का आरोप बेबुनियाद है. हमारी कंपनी और खेल विभाग के बीच का अनुबंध 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका था. इसके बाद भी हमने 24 जुलाई तक मानार्थ (Complimentary) आधार पर तकनीकी सहायता दी. टेंडर और अनुबंध (RFP) की शर्तों के अनुसार, विभाग द्वारा 90% भुगतान किए जाने के बाद ही सोर्स कोड और रिपोजिटरी ट्रांसफर की जानी थी. विभाग ने पिछले 18 महीनों से एडब्ल्यूएस (AWS) सर्वर का भुगतान नहीं किया है. इस कारण हमने 15 दिनों में 7 बार ईमेल से सूचित भी किया. सर्वर पेमेंट में देरी के कारण एडब्ल्यूएस ने खुद कुछ सेवाएं सीमित की हैं.
-अंशुल बगई, सीईओ, खेलो टेक इंडिया-

कंपनी के सीईओ ने कहा हमने डाटा डाउनलोड नहीं किया: खेलो टेक इंडिया के सीईओ अंशुल ने कहा कि इसके बावजूद वर्तमान में पोर्टल और जीएमएस (GMS) सुचारू रूप से चल रहा है. विभाग के पास डैशबोर्ड का पूरा एक्सेस है. जब पोर्टल चल ही रहा है, तो 3.5 लाख खिलाड़ियों का डेटा गायब होने या चोरी होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. हमने कोई डाटा डाउनलोड नहीं किया है. अंशुल ने कहा कि-

पुलिस या आईटी विभाग को इसके सर्वर लॉग दिखाए जा सकते हैं. 400 से अधिक दिनों के भुगतान में विलंब के कारण हमें एमएसएमई से 5 करोड़ रुपये का ऋण तक लेना पड़ा है. 8 सितंबर को हमारे खिलाफ दर्ज कराई गई. शिकायत पूरी तरह से एकतरफा और अनुचित है.
-अंशुल बगई, सीईओ, खेलो टेक इंडिया-

पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की: इस मामले में पुलिस और साइबर सेल ने एफआईआर दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है. पुलिस सर्वर लॉग्स, ईमेल पत्राचार और दोनों पक्षों के अनुबंध पत्रों का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह मामला केवल तकनीकी व वित्तीय विवाद (Contractual Dispute) है या इसमें साइबर अपराध व डेटा उल्लंघन की धाराएं बनती हैं.

Spread the love

More Stories

You may have missed