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July 21, 2026

घराट

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केदारनाथ में श्रद्धालुओं के लिए होगा वनवे रूट, खड़ी चढ़ाई के पैच को आसान करेगा नया एलाइनमेंट

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श्रद्धालुओं के लिए बाबा केदार तक पहुंचना अब आसान होगा. जल्द श्रद्धालुओं के लिए वनवे रूट बनाया जाएगा.

देहरादून (उत्तराखंड): बाबा केदार के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों से करीब 16 से 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर धाम पहुंचते हैं. यात्रा मार्ग की लंबी दूरी, खड़ी चढ़ाई, मौसम की चुनौती और भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए अब यात्रा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है. केदारनाथ यात्रा के पुराने पैदल मार्ग पर टॉयलेट, बैठने की व्यवस्था और अधिकारियों के लिए अलग स्थान जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. साथ ही पुराने मार्ग को पैदल श्रद्धालुओं के लिए और नए मार्ग को घोड़े-खच्चरों के लिए इस्तेमाल करने की योजना पर भी विचार चल रहा है. बड़ी लिनचौली से आगे की कठिन चढ़ाई को कम करने के लिए मार्ग के रिएलाइनमेंट की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं.

कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई और संकरे रास्ते: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा आध्यात्मिक अनुभव है. इनमें केदारनाथ धाम की यात्रा सबसे कठिन यात्राओं में शामिल मानी जाती है. बाबा केदार के दर्शन के लिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ता है. कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई, संकरे रास्ते, बदलता मौसम और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियां श्रद्धालुओं की परीक्षा लेती हैं.

सुगम और सुरक्षित यात्रा पर फोकस: बावजूद इसके हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन की इच्छा लेकर इस कठिन यात्रा को पूरा करते हैं. कई श्रद्धालु घंटों पैदल चलकर बारिश और ठंड का सामना करते हुए केदारनाथ धाम पहुंचते हैं. ऐसे में अब सरकार और प्रशासन का फोकस इस यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर है.

पैदल मार्ग विकसित करने का निर्णय: इसी को लेकर पूर्व में हुई समीक्षा बैठक में केदारनाथ यात्रा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई थी. बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा के दौरान किस तरह बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. इसके लिए पुराने पैदल मार्ग पर आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने का निर्णय लिया गया है.

प्रशासन ने भेजा प्रस्ताव: प्रस्तावित योजना के तहत यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए टॉयलेट की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा थकान के बाद आराम करने के लिए बैठने की सुविधा विकसित की जाएगी. अधिकारियों और यात्रा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी अलग से स्थान बनाए जाने पर विचार किया गया है. जिलाधिकारी की ओर से इन जरूरी कार्यों को लेकर प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है.

यात्रियों को मिलेगी राहत: दरअसल केदारनाथ की पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं को सबसे बड़ी परेशानी लंबी दूरी और कठिन चढ़ाई के कारण होती है. कई श्रद्धालु उम्रदराज होते हैं, तो कई पहली बार इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्र में यात्रा करते हैं. लगातार पैदल चलने के बाद उन्हें आराम करने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता. ऐसे में यात्रा मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं का विकास श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.

घोड़े-खच्चरों के लिए नए मार्ग का प्रयोग: केदारनाथ यात्रा के लिए पुराने पैदल मार्ग को भी अगले साल श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है. योजना यह है कि पैदल जाने वाले श्रद्धालु पुराने मार्ग का इस्तेमाल करें, जबकि घोड़े-खच्चरों से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नए मार्ग का प्रयोग किया जाए.

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर वन-वे: इस व्यवस्था के जरिए केदारनाथ यात्रा मार्ग पर वन-वे व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है. अगर यह योजना लागू होती है तो पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को अलग किया जा सकेगा. इससे यात्रा मार्ग पर भीड़ कम करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी बेहतर की जा सकती है.

अंतिम फैसले का इंतजार: रामबाड़ा से गरुड़चट्टी होते हुए केदारनाथ तक जाने वाला पुराना मार्ग वर्ष 2013 की भीषण आपदा में बह गया था. बाद में इस पुराने मार्ग को दोबारा तैयार किया गया. हालांकि इसके उपयोग को लेकर जिला प्रशासन को निर्णय लेने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है. फिलहाल इसी पुराने मार्ग को पैदल श्रद्धालुओं के लिए इस्तेमाल करने और नए मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही कराने का प्लान तैयार किया जा रहा है. इस व्यवस्था से यात्रा के दौरान होने वाली अव्यवस्था और टकराव की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है.

केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं. इसके लिए पुराने मार्ग का उपयोग भी अगले साल से किया जाएगा, जिसमें वन वे व्यवस्था किए जाने पर विचार किया गया है.
-धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन-

चढ़ाई का दबाव कम करने पर जोर: केदारनाथ पैदल यात्रा में बड़ी लिनचौली से आगे का क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में माना जाता है. इस मार्ग पर काफी ज्यादा चढ़ाई है. कई श्रद्धालुओं के लिए यह चढ़ाई बेहद कठिन साबित होती है. थकान और ऊंचाई के कारण यहां कई बार श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है.अब इस क्षेत्र में मार्ग के रिएलाइनमेंट पर विचार किया जा रहा है. प्रस्तावित योजना के तहत रास्ते को इस तरह तैयार करने की संभावना तलाशी जा रही है कि चढ़ाई का दबाव कम हो सके.

मौसम साफ होने के बाद रिएलाइनमेंट की संभावनाओं के लिए मौके पर स्थिति को देखा जाएगा. कोशिश की जाएगी कि जो पैदल श्रद्धालु इस जगह पर खड़ी चढ़ाई के कारण दिक्कतें महसूस करते हैं उसे दूर किया जाए और इस पैच पर नये एलाइनमेंट के जरिए रास्ते को सुगम किया जाएं.
-पंकज कुमार पांडे, सचिव, लोक निर्माण विभाग-

नया एलाइनमेंट किया जाएगा तैयार: इसके लिए संभव है कि मार्ग की लंबाई कुछ बढ़ जाए, लेकिन श्रद्धालुओं को खड़ी चढ़ाई से राहत मिल सकेगी.इस संबंध में लोक निर्माण विभाग से चर्चा की जा रही है. बारिश के बाद मौसम साफ होने पर मौके पर जाकर इस मार्ग का सर्वे किया जाएगा. यदि सर्वे के बाद परिस्थितियां अनुकूल पाई जाती हैं तो बड़ी लिनचौली से आगे के इस पैच का नया एलाइनमेंट तैयार किया जा सकता है.

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