Categories

September 12, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

ये कैसी श्रद्धा? गंगोत्री के बाद यमुनोत्री में डाले जा रहे वस्त्र, उद्गम स्थल झेल रहे प्रदूषण का दंश

1 min read

मां यमुना मायके से ही दूषित होती जा रही है. इसकी वजह श्रद्धालुओं द्वारा यमुना नदी में अर्पित किए गए वस्त्र हैं.

उत्तरकाशी: गंगोत्री धाम के बाद अब यमुनोत्री धाम में श्रद्धालु यमुना नदी में रंग बिरंगे अंग वस्त्र और कपड़े यमुना नदी में अर्पित कर रहे हैं. इससे यमुना नदी की पवित्र धारा अपने उद्गम स्थल से ही प्रदूषण का दंश झेलने को मजबूर हो गई है. नदी में डाले जा रहे कपड़े और अन्य सामग्री न केवल जल की स्वच्छता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी आस्था को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ें व यमुना नदी में वस्त्र और अन्य सामग्री प्रवाहित न करें.

मां यमुना के दर्शन के लिए यमुनोत्री धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं की आस्था अब पर्यावरण के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है. श्रद्धालु यमुना नदी में रंग-बिरंगे अंग-वस्त्र और कपड़े अर्पित कर रहे हैं. इससे यमुना नदी अपने उद्गम स्थल से ही प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर हो गई है. स्थिति यह है कि धाम क्षेत्र में नदी तटों पर बहकर आए कपड़ों का अंबार लग चुका है. इससे न केवल यमुना का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, बल्कि जल की स्वच्छता पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. श्रद्धालु मंदिर में चढ़ावा देने के बजाय सीधे नदी में सामग्री प्रवाहित कर रहे हैं, जो बाद में कचरे के रूप में तटों पर जमा हो जाती है.

हालांकि पुरोहित समाज और चारधाम यात्रा से जुड़े कर्मचारी लगातार अपील कर रहे हैं कि श्रद्धालु नदी में कपड़े न डालें, लेकिन इसका जमीनी असर नजर नहीं आ रहा. प्रशासन और संबंधित विभाग स्वच्छता को लेकर दावे तो कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है. मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, सुरेश उनियाल, मनोज उनियाल, महावीर पंवार समेत तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मां यमुना की निर्मल और अविरल धारा को बचाना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने प्रशासन से सख्त नियम लागू करने और प्रभावी जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है.

वहीं, यमुनोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी का कहना है कि यह परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है. लेकिन इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए जिला पंचायत और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर यमुना की स्वच्छता बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे.

Spread the love

More Stories

You may have missed