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September 12, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

इंटरव्यू: ‘वक्फ बोर्ड देश में है तो सनातन बोर्ड क्यों नहीं’, देवकीनंदन ठाकुर ने मक्का-मदीना पर कही ये बात

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प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु ने देवकीनंदन ठाकुर ने खास बातचीत में कहा कि अभी चारधाम में गैर सनातनी प्रवेश पर रोक लगी है ये आदेश भारत के हर तीर्थ क्षेत्र में लागू होना चाहिए। जब मक्का मदीना में हिंदू नहीं जा सकता तो मथुरा, अयोध्या या हर तीर्थ क्षेत्र में गैर हिंदू के प्रवेश पर रोक क्यों नहीं लग सकती।

आज अगर देश में वक्फ बोर्ड है तो सनातन बोर्ड भी होना चाहिए। सनातन बोर्ड बनेगा तो सनातन का उत्थान होगा। गुरुकुलम बनेंगे सनातनियों को रोजगार मिलेगा। ये बातें प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने खास बातचीत में कहीं।

उन्होंने कहा कि अभी चारधाम में गैर सनातनी प्रवेश पर रोक लगी है ये आदेश भारत के हर तीर्थ क्षेत्र में लागू होना चाहिए। जब मक्का मदीना में हिंदू नहीं जा सकता तो मथुरा, अयोध्या या हर तीर्थ क्षेत्र में गैर हिंदू के प्रवेश पर रोक क्यों नहीं लग सकती।

आज कल हर तीर्थ क्षेत्रों में चोरी समेत कई घटनाएं हो रही हैं। अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा की बात करना अधर्म नहीं है। हम हिंदू-मुस्लिम की बात नहीं सिर्फ अपने तीर्थ क्षेत्रों को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। हमारे मंदिर सुरक्षित हों इसकी मांग हर युवा को करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंदिरों का पैसा सरकार नहीं ले जा सकती, इसके लिए बोर्ड गठन कर उसका पैसा वहां जाना चाहिए। ताकि सनातन का उत्थान हो। आज बड़ी संख्या में मदरसे हैं लेकिन गुरुकुलम नहीं हैं।

विज्ञान है तो सनातन का ज्ञान भी होना चाहिए। कहा कि सनातनी हो तो सनातनी बनो और सनातन का प्रचार करो। उन्होंने कहा कि व्यक्ति वही तनाव में रहता है जो अध्यात्म में नहीं रहता। विज्ञान ने समाज-देश को काफी कुछ दिया है लेकिन भगवान की उपस्थिति को हम नहीं नकार सकते। दूसरों का हित कर रहे हो तो यही धर्म है और यही सनातन सिखाता है।

तिलक लगाया, मंदिर गए… ये धार्मिक नहीं 
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जिसने धर्म का पथ छोड़ दिया वहीं अशांत है। जिसने तिलक लगा लिया, मंदिर हो आए इसे धार्मिक नहीं कह सकते, ये धर्म के चिह्न हैं। धार्मिकता है उन ग्रंथों-पुराणों को अपने जीवन में उतारने से।

हम भगवान राम की कथा सुनते हैं लेकिन उनके जैसा नहीं बनना चाहते। आज कल लोग अपने विकास में समय न लगाकर दूसरों को गिराने में लगा रहे हैं। अपने आप को बचाने में, उठाने में समय लगा लें तो यही धार्मिकता होती है।

पति का दायित्व, पत्नी का अपमान न हो
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज कल लोगों में सहनशीलता नहीं है। बेटियां घर की नौकरानी नहीं हैं। पति का दायित्व है कि घर और बाहर पत्नी का अपमान नहीं होना चाहिए। परिवार को भी समझना चाहिए कि आप बेटी लाए हो नौकरानी नहीं।

माता सीता ने कभी अपनी सास को उलटा जवाब नहीं दिया न ही भगवान राम ने कभी माता सीता का अपमान होने दिया। घरों में रामायण रहेगी तो निश्चित ही परिवार मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि प्रेमिका के साथ चले जाओ और माता-पिता को छोड़ दो, ये इंसानियत नहीं है।

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