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September 17, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग में हुए शामिल, उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत पर दिया जोर..

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का सशक्त प्रतीक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कौथिग उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने का एक अद्भुत मंच है। लोकगीत, लोक नृत्य, लोक भाषा, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की प्रस्तुति न केवल हमारी परंपराओं को जीवंत रखती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ संकल्प का सशक्त उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने उत्तर प्रदेश में निवास कर रहे हजारों उत्तराखण्डवासियों को एक सूत्र में पिरोकर उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का सराहनीय कार्य किया है। रजत जयंती वर्ष में प्रवेश करना संस्था के समर्पण और तपस्या का प्रमाण है।

उन्होंने लखनऊ से अपने भावनात्मक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि यह शहर उनकी कर्मभूमि रहा है, जहां से उन्होंने जनसेवा का संकल्प लिया। उत्तरायणी जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में लखनऊ आना उनके लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने जैसा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति, आस्था और सभ्यता को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे ऐतिहासिक कार्य इसी दृष्टि के उदाहरण हैं। ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ अभियान ने देश की विविध संस्कृतियों को एकता के सूत्र में बांधा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी विज़न के अनुरूप उत्तराखण्ड सरकार देवभूमि के विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। केदारनाथ-बदरीनाथ मास्टर प्लान, केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, विवेकानंद एवं शारदा कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को नई भव्यता मिल रही है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड को अब केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखा गया है। नई नीतियों के चलते राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर हब और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियानों से पर्यटन और आर्थिकी को नया बल मिला है।

ग्रामीण विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे योजना, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना, एक जनपद–दो उत्पाद और हाउस ऑफ हिमालयाज जैसे प्रयासों से गांवों की खुशहाली सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने सरकार के सख्त कानूनों, रोजगार सृजन और निर्णायक फैसलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यही नया उत्तराखण्ड है, जहां विकास, विश्वास और अवसर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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