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October 20, 2026

घराट

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11 नवंबर को भैया दूज पर बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, मंदिर समिति ने की घोषणा

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यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के लिए बंद होंगे. इसके बाद मां यमुनोत्री के दर्शन खरशाली में किए जाएंगे.

उत्तरकाशी (उत्तराखंड): विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट आगामी 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. विजयदशमी के अवसर पर यमुनोत्री धाम में मंदिर समिति और पुरोहित समाज की मौजूदगी में आयोजित बैठक में कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निकाला गया. तय कार्यक्रम के अनुसार, बुधवार को सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे. कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री धाम में होने वाली नियमित पूजा-अर्चना का समापन हो जाएगा. साथ ही उसी दिन केदारनाथ धाम के कपाट भी बंद होंगे.

यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने बताया कि, विजयदशमी के पर्व पर परंपरानुसार मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में कपाट बंद करने की तिथि और शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया. भैया दूज के दिन निर्धारित मुहूर्त में मां यमुना के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे. इसके बाद शीतकाल में मां यमुना की पूजा-अर्चना परंपरानुसार उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में होगी. इससे श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भी मां यमुना के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे.

यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस धाम की नियमित यात्रा का समापन हो जाएगा. सर्दियों में अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही सीमित हो जाती है. ऐसे में धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए कपाट बंद किए जाते हैं और मां यमुना की पूजा उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली पर संपन्न होती है.
-सुनील उनियाल, सचिव, यमुनोत्री मंदिर समिति-

केदारनाथ धाम के कपाट भी भैया दूज पर होंगे बंद: उधर, भगवान केदारनाथ धाम के कपाट भी भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे. इसके साथ ही उत्तराखंड के दोनों प्रमुख धामों यमुनोत्री और केदारनाथ में इस वर्ष की यात्रा का समापन होगा. कपाट बंद होने के बाद दोनों धामों में विराजमान देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना शीतकालीन प्रवास स्थलों पर संपन्न कराई जाएगी. हर वर्ष की तरह इस बार भी कपाट बंद होने की प्रक्रिया धार्मिक परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूरी की जाएगी.

चारधाम यात्रा के समापन की ओर बढ़ने के साथ ही अब श्रद्धालुओं की निगाहें कपाट बंद होने के धार्मिक आयोजनों पर टिकी हैं. यमुनोत्री धाम में कपाट बंद होने के बाद मां यमुना के दर्शन के लिए श्रद्धालु खरसाली पहुंच सकेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा परंपरानुसार निर्धारित शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पर संपन्न होगी.

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