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October 26, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

तीन हफ्ते बाद पिंजरे में कैद हुई दहशत बनी मादा तेंदुआ, दो युवकों पर हमला कर किया था घायल

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गुलदार के पिंजरे में कैद होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. गुलदार की धमक से लोग खौफजदा थे.

अल्मोड़ा: भैंसियाछाना ब्लॉक के छानी गांव में पिछले 22 दिनों से ग्रामीणों के लिए दहशत का पर्याय बनी मादा तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई. तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया. तेंदुए के पिंजरे में कैद होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.

बीते माह 19 तारीख को घर से दुकान की ओर जा रहे एक ग्रामीण पर मादा तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया था. हमले में ग्रामीण घायल हो गया था. इससे एक दिन पूर्व भी तेंदुए ने एक अन्य ग्रामीण पर हमला किया था. लगातार दो दिनों तक हुए हमलों के बाद गांव में भय का माहौल पैदा हो गया था. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से घायल ग्रामीण को उपचार के लिए अल्मोड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया था.

ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा स्थापित किया और अलग-अलग स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए. वन विभाग की टीम लगातार तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रख रही थी. करीब एक सप्ताह बाद पिंजरे में तेंदुए का एक शावक कैद हुआ. टीम ने शावक का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया. हालांकि, मादा तेंदुए के नहीं पकड़े जाने से ग्रामीणों की चिंता बनी रही.

ग्रामीणों का कहना था कि रात के समय तेंदुए की दहाड़ सुनाई देने से लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे थे. खेतों और रास्तों में आवाजाही के दौरान भी लोगों में अनहोनी की आशंका बनी रहती थी. ग्रामीण लंबे समय से मादा तेंदुए को पकड़ने की मांग कर रहे थे. आखिरकार मादा तेंदुआ वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई.

हवालबाग के रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए का रेस्क्यू किया और उसे एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है. वहां तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा. इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. मादा तेंदुए के पकड़े जाने के बाद छानी गांव के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है. हालांकि ग्रामीणों ने क्षेत्र में वन विभाग की गश्त और निगरानी जारी रखने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

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