Categories

October 20, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले पर सुनवाई, राज्य सरकार ने फिर मांगा समय

1 min read

उत्तराखंड में अभी तक नहीं हो पाई लोकायुक्त की नियुक्ति, राज्य सरकार ने मांगा एक महीने का समय, हाईकोर्ट ने दो हफ्ते का दिया टाइम

नैनीताल: उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर साल 2021 में दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए नियमावली बनाई जानी है. उन नियमों के तहत उनकी नियुक्ति करने वाली सर्च कमेटी को भेजा जाना है. जिसके आधार पर लोकायुक्त व सदस्यों का चयन होगा.

बिना नियमावली के लोकायुक्त और उसकी कार्यकारिणी की नियुक्ति नहीं हो सकती. इसलिए सरकार को एक महीने का समय दिया जाए, लेकिन कोर्ट नें सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दो हफ्ते के भीतर क्या प्रगति हुई? उसकी स्थिति से कोर्ट को अवगत कराएं. अब मामले की अगली सुनवाई 2 हफ्ते के बाद होगी. आज मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई.

क्या है मामला? दरअसल, हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है. जबकि, लोकायुक्त संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है. जनहित याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है, लेकिन उत्तराखंड में तमाम तरह की अनियमितताओं और घोटाले हो रहे हैं.

ऐसे में हर एक छोटे से छोटा मामला भी हाईकोर्ट की टेबल पर लाना पड़ रहा है. जनहित याचिका में ये भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसियां सरकार के अधीन आती है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के हाथों में है. वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नहीं है, जिसके पास यह अधिकार हो कि वो बिना किसी शासन के अनुमित के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सकें.

याचिका में कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, विजिलेंस या सीएम ऑफिस के पास ही रहता है. एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के तमाम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाए. जिससे कि राज्य में हो रहे तमाम करप्शन पर रोक लगाई जा सके. उनके मामलों की सुनवाई लोकायुक्त के वहां होगी और न्यायालयों का कार्यभार में कमी आएगी. जबकि, यह पद साल 2013 से ही खाली पड़ा है.

Spread the love

More Stories

You may have missed