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September 2, 2026

घराट

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पिथौरागढ़ के बस्तड़ी गांव में कद नहीं, किरदार की हुई जीत, 3 फीट के चन्नू बने निर्विरोध उपप्रधान

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पिथौरागढ़ के बस्तड़ी गांव में चंद्रशेखर भट्ट ‘चन्नू’ उपप्रधान बने है. लोगों की मदद के लिए वो हमेशा खड़े रहते हैं.

पिथौरागढ़: सीमांत पिथौरागढ़ के बस्तड़ी गांव में तीन फीट के चंद्रशेखर भट्ट ‘चन्नू’ को निर्विरोध उपप्रधान चुना गया है. तीन फीट के चन्नू को ग्रामीणों ने निर्विरोध चुनायह चुनाव दर्शाता है कि कद नहीं, किरदार मायने रखता है. कनालीछीना विकासखंड के ग्राम बस्तड़ी में हुए उपप्रधान चुनाव ने एक सकारात्मक संदेश दिया है. करीब तीन फीट लंबाई वाले 31 वर्षीय चंद्रशेखर भट्ट चन्नू को ग्रामीणों ने निर्विरोध उपप्रधान चुनकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में व्यक्ति की असली पहचान उसके कद से नहीं, बल्कि उसके किरदार, सेवा और जनता के विश्वास से होती है.

राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) चंद्रशेखर भट्ट लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं. ग्रामीणों के सुख-दुख में उनकी सहभागिता, सहज व्यवहार और गांव के विकास के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें लोगों के बीच भरोसेमंद चेहरा बनाया. यही वजह रही कि उपप्रधान पद के लिए उनके सामने किसी ने नामांकन तक दाखिल नहीं किया और उन्हें सर्वसम्मति से निर्विरोध चुन लिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि चन्नू ने हमेशा बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद की और गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई.

उनकी कार्यशैली और सेवा भावना को देखते हुए पूरे गांव ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया. चंद्रशेखर भट्ट की यह सफलता उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों को अपनी राह की बाधा मान लेते हैं. बस्तड़ी के ग्रामीणों का यह फैसला बताता है कि जब समाज व्यक्ति के कर्म और चरित्र को प्राथमिकता देता है, तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं. नई जिम्मेदारी मिलने के बाद चन्नू ने कहा कि वह गांव विकास, पारदर्शिता और सामाजिक एकता की दिशा में कार्य करेंगे. निर्विरोध उपप्रधान चुने जाने के बाद चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि यह जीत पूरे गांव की है. उन्होंने ग्रामीणों का आभार जताते हुए कहा कि वह गांव के विकास, पारदर्शिता और सामाजिक एकता के लिए काम करेंगे.चन्नू को निर्विरोध उपप्रधान चुना जाना यह साबित करता है कि समाज जब व्यक्ति के कार्य को देखता है, जिसमें शारीरिक सीमाएं मायने नहीं रखतीं. बस्तड़ी के लोगों का यह फैसला उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों को अपनी राह की बाधा मान लेते हैं. चन्नू की कार्यशैली और सेवा भावना ने ही उन्हें गांव का उपप्रधान चुना गया.

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