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July 11, 2026

घराट

खबर पहाड़ से-

उत्तराखंड कांग्रेस के चुनावी रण में दिख रहा रणनीतिक ‘खालीपन’, हरदा की गैरहाजिरी का कितना प्रभाव?

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2026 की रणनीति में जुटी कांग्रेस, पार्टी के सबसे सीनियर और कद्दावर नेता हरीश रावत गैरहाजिर, देहरादून से नवीन उनियाल की रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए बाकी बचे महज कुछ महीनों को राजनीतिक रणनीतियों के लिए अहम माना जा रहा है. खास बात ये है कि कांग्रेस की तरफ से चुनाव के लिए होमवर्क भी होने लगा है और जिम्मेदारियां भी तय की जाने लगी हैं, लेकिन राज्य स्थापना के बाद यह पहला मौका है, जब इस बेहद खास पल में कांग्रेस के सबसे सीनियर नेता की ही भूमिका शून्य हो गई है.

दरअसल, इस बार हरीश रावत की गैरमौजूदगी में ही पार्टी रण के लिए मैदान भी चुन रही है और चुनावी रणबांकुरों का चयन भी कर रही है. इतना ही नहीं चुनाव में सभी की भूमिकाओं को तय करने के लिए भी इस वक्त पार्टी की सक्रिय राजनीति में हरीश रावत मौजूद नहीं हैं.

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और कांग्रेस संगठन भी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है. यही नहीं केंद्रीय नेतृत्व लगातार प्रदेश का दौरा कर रहा है, जिसके जरिए कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इन तमाम गतिविधियों के बीच कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा लंबे समय से राजनीतिक मंचों और कार्यक्रमों से दूर है.

करीब 1 महीने से कहीं नजर नहीं आए हरदा: पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत पिछले करीब 1 महीने से कहीं नजर नहीं आए हैं. इसके पीछे की वजह उनके खराब स्वास्थ्य को बताया गया है, लेकिन बावजूद इसके पार्टी में उनको लेकर तमाम चर्चाएं जारी हैं. करीब एक महीने पहले हरीश रावत देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुए थे.

इसके बाद से वे किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, संगठनात्मक बैठक या सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आए हैं. इस दौरान कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव को लेकर कई अहम कार्यक्रम आयोजित किए. प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेशभर में बैठकों का सिलसिला शुरू किया, लेकिन इन कार्यक्रमों में हरीश रावत की कमी लगातार महसूस की गई.

कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल का भी देहरादून दौरा हुआ. जिसे प्रदेश कांग्रेस के लिए इसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक माना गया, क्योंकि लंबे समय बाद वेणुगोपाल उत्तराखंड पहुंचे थे. इसके बावजूद हरीश रावत इस कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए. इसके बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओ के बीच चर्चा इस बात को लेकर रही कि क्या हरीश रावत का स्वास्थ्य ज्यादा खराब है और क्या चुनावी रणनीतियों में उनके अनुभव का लाभ पार्टी को आने वाले दिनों में मिल पाएगा या नहीं?

पार्टी के नेताओं के अनुसार हरीश रावत की अनुपस्थिति का मुख्य कारण उनका स्वास्थ्य है. कुछ दिन पहले स्वयं हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का उल्लेख किया था. ऐसे में पार्टी के भीतर उनकी गैरमौजूदगी को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जा रहा है, न कि किसी राजनीतिक असहमति से. कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह कहते हैं कि,

जल्द ही हरीश रावत स्वस्थ होंगे और राजनीतिक सक्रियता के साथ पहले की तरह पार्टी के कार्यक्रमों में दिखाई देंगे.“- प्रीतम सिंह, कांग्रेस विधायक

हालांकि, चुनावी तैयारियों के इस दौर में हरीश रावत की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक विश्लेषण भी शुरू हो गया है. उत्तराखंड कांग्रेस में लंबे समय तक हरीश रावत चुनावी रणनीति, संगठन और जनसंपर्क का प्रमुख चेहरा रहे हैं. राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद उनकी पहचान रहा है.

हरदा की गैर मौजूदगी पर अलग-अलग राय: ऐसे में जब चुनाव नजदीक हों और वे लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हों, तो यह स्वाभाविक है कि इससे आगामी चुनाव पर इसके प्रभाव की भी बात होगी. पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय भी सामने आ रही है.

एक वर्ग का मानना है कि हरीश रावत जल्द स्वस्थ होकर फिर से चुनावी अभियान की कमान संभालेंगे और पहले की तरह कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय भूमिका निभाएंगे. वहीं, दूसरा वर्ग यह कहता है कि कांग्रेस किसी एक व्यक्ति पर आधारित पार्टी नहीं है, बल्कि एक विचारधारा और संगठन के आधार पर आगे बढ़ने वाली राजनीतिक पार्टी है. इसलिए किसी एक नेता की अस्थायी गैरमौजूदगी से चुनावी तैयारियों पर निर्णायक असर नहीं पड़ेगा.

अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य में सुधार के बाद हरीश रावत कब सक्रिय राजनीति में वापसी करते हैं. विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आएंगे, उनकी भूमिका और सक्रियता को लेकर चर्चाएं भी तेज होंगी. फिलहाल, कांग्रेस चुनावी तैयारियों में जुटी है, लेकिन पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हरीश रावत की गैरमौजूदगी पार्टी में राजनीतिक खालीपन को जरूर महसूस कराएगी. हरीश रावत पहली बार 1 फरवरी 2014 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने. 27 मार्च 2016 को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लग गया था. वहीं 1 अप्रैल 2016 को हरीश रावत दोबारा सीएम बने , लेकिन एक दिन बाद फिर से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया था. 11 मई 2016 को फिर से हरदा को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली, 18 मार्च 2017 तक वो सूबे के सीएम रहे.

 

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