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June 18, 2026

घराट

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देहरादून: दून यूनिवर्सिटी और CBSE दफ्तर के पास पशु शवदाह गृह? कैसे मिली अनुमति, निगम पर भड़के लोग

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मोथरोवाला में प्रस्तावित पशु शवदाह गृह को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है. आबादी से काफी दूर बनाने की मांग. रिपोर्ट- धीरज सजवाण.

देहरादून: मोथरोवाला क्षेत्र में एसटीपी (STP) प्लांट के पास प्रस्तावित पशु शवदाह गृह के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ रहा है. क्षेत्र की विभिन्न आवासीय सोसाइटियों के पदाधिकारी और निवासी इस निर्माण को रिहायशी इलाके के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसे तत्काल अन्य जगह ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं.

स्थानीय पार्षद सोबत चंद रमोला की पहल पर एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त और क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं. लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पशु शवदाह गृह बनाया जा रहा है, उसके आसपास घनी आबादी है और वहां पहले से हजारों परिवार निवास कर रहे हैं. ऐसे में नगर निगम द्वारा बिना स्थानीय लोगों की राय लिए इस तरह का निर्माण शुरू करना कई सवाल खड़े करता है.

ईटीवी भारत की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत की. निर्माण स्थल के आसपास कई आवासीय कॉलोनियां, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी कार्यालय मौजूद हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम ने क्षेत्र की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करते हुए ऐसा निर्णय लिया है, जिसका सीधा असर हजारों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है.

दुर्गंध और प्रदूषण की आशंका से लोगों में नाराजगी: दून यूनिवर्सिटी रोड पर स्थित अनिकेत विहार के सचिव सुधाकर विंजवाल ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि,

हमारी कॉलोनी निर्माण स्थल के बेहद करीब स्थित है. लंबे समय से स्थानीय लोग इस प्रस्तावित पशु शवदाह गृह का विरोध कर रहे हैं और कई बार अपनी शिकायतें क्षेत्रीय विधायक तक भी पहुंचा चुके हैं. इसके बावजूद अचानक निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और नगर निगम की ओर से इसके आदेश भी जारी कर दिए गए. एक विकसित और पॉश इलाके के बीच पशु शवदाह गृह का निर्माण किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता.
– सुधाकर विंजवाल, सचिव, अनिकेत विहार सोसाइटी –

वहीं, गीतांजलि एन्क्लेव की महिला अध्यक्ष सावित्री तोपवाल ने कहा कि,

मेरा घर निर्माण स्थल से महज कुछ फीट की दूरी पर है. पशु शवों के निस्तारण के दौरान निकलने वाली दुर्गंध और संभावित प्रदूषण से क्षेत्र का वातावरण प्रभावित होगा. यदि प्रशासन को इस तरह की परियोजना शुरू करनी ही थी तो पहले स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी. लोगों ने अपने जीवन की जमा-पूंजी लगाकर यहां मकान खरीदे हैं और बनाए हैं. लेकिन अब उनके सामने रहने योग्य वातावरण बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है.
– सावित्री तोपवाल, महिला अध्यक्ष, गीतांजलि एन्क्लेव सोसाइटी –

दून यूनिवर्सिटी, सीबीएसई कार्यालय और छात्रावास के पास पशु शवदाह गृह का निर्माण: स्थानीय निवासियों का कहना है कि, यह केवल एक कॉलोनी का मामला नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की चिंता का विषय है. सावित्री तोपवाल ने बताया कि,

प्रस्तावित शवदाह गृह के आसपास सीबीएसई का क्षेत्रीय कार्यालय, दून विश्वविद्यालय, जनजाति कार्यालय और कई अन्य संस्थान मौजूद हैं. इसके अलावा, दून विश्वविद्यालय का छात्रावास भी इसी क्षेत्र में स्थित है, जहां देशभर से छात्र शिक्षा प्राप्त करने आते हैं. ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की दुर्गंध या पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न होती है तो इसका असर केवल स्थानीय परिवारों पर ही नहीं बल्कि छात्रों और कर्मचारियों पर भी पड़ेगा.
– सावित्री तोपवाल, महिला अध्यक्ष, गीतांजलि एन्क्लेव सोसाइटी –

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब आसपास इतने महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं, तो फिर नगर निगम ने इस स्थान का चयन किस आधार पर किया. उनका मानना है कि इस प्रकार की सुविधाओं के लिए ऐसे स्थानों का चयन होना चाहिए, जो आबादी से पर्याप्त दूरी पर हो और जहां जनजीवन प्रभावित न हो.

बिजली कटौती और रखरखाव को लेकर भी चिंता: गीतांजलि एन्क्लेव सोसाइटी के महासचिव योगेंद्र चौहान ने बताया कि,

जानकारी मिली है कि यह शवदाह गृह इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित होगा. हालांकि, इसके बावजूद लोगों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं. यदि किसी कारणवश बिजली आपूर्ति बाधित होती है या मशीनें खराब हो जाती हैं तो मृत पशुओं के निस्तारण में देरी होगी और पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल सकती है.
– योगेंद्र चौहान, महासचिव, गीतांजलि एन्क्लेव सोसाइटी –

इसके अलावा उन्होंने ठेका प्रणाली के तहत संचालन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि यदि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हुए या रखरखाव में लापरवाही बरती गई तो भविष्य में गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.

निर्माण के विरोध में स्थानीय विधायक विनोद चमोली से मिले स्थानीय लोग (PHOTO-ETV Bharat)

गीतांजलि वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष विजय बुटोला ने भी इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि,

नगर निगम पहले ही इस क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण से जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण लोगों की नाराजगी झेल रहा है. ऐसे में अब पशु शवदाह गृह बनाकर क्षेत्रवासियों की परेशानियां और बढ़ाई जा रही हैं. नगर निगम जनता की सुविधा के बजाय उनकी समस्याओं को बढ़ाने वाले निर्णय ले रहा है.
– विजय बुटोला, अध्यक्ष, गीतांजलि वेलफेयर सोसाइटी –

विधायक ने निर्माण स्थल को बताया अनुपयुक्त: पूरे विवाद के बीच धर्मपुर विधायक विनोद चमोली भी स्थानीय लोगों के समर्थन में नजर आए. उन्होंने कहा कि,

अपने मेयर कार्यकाल के दौरान उन्होंने पशु शवदाह गृह की आवश्यकता को देखते हुए इसके लिए ऐसे स्थान का प्रस्ताव दिया था, जो आबादी से काफी दूर था. लेकिन विभिन्न कारणों से उस योजना पर अमल नहीं हो सका. अब जब जानकारी मिली कि दून यूनिवर्सिटी और घनी आबादी वाले क्षेत्र के बीच यह निर्माण किया जा रहा है तो यह गलत है.
– विनोद चमोली, स्थानीय विधायक, धर्मपुर –

विधायक विनोद चमोली ने बताया कि, जिस क्षेत्र में पशु शवदाह गृह प्रस्तावित है, वहां पार्क विकसित करने की भी योजना है. यहां पुरानी टिहरी की स्मृतियों को संजोने के लिए विशेष मॉडल तैयार करने के साथ-साथ छठ पार्क और इनडोर खेल गतिविधियों का भी प्रस्ताव है. ऐसे में इस स्थान पर पशु शवदाह गृह बनाना क्षेत्र के विकास की मूल अवधारणा के विपरीत है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि आबादी के बीच इस प्रकार का निर्माण उचित नहीं है और इसके लिए नगर निगम को कोई वैकल्पिक स्थान तलाशना चाहिए.

क्या बोले नगर आयुक्त: वहीं इस पूरे मामले पर जब नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,

जब इस परियोजना के आदेश जारी किए गए थे, तब उनके पास यह जिम्मेदारी नहीं थी. हालांकि विधायक और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया है. जल्द ही अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया जाएगा और सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
– आलोक कुमार पांडे, नगर आयुक्त, देहरादून नगर निगम –

नगर आयुक्त ने यह भी कहा कि, प्रारंभिक योजना गैस आधारित प्रणाली की थी, लेकिन अब इसे इलेक्ट्रिक मॉडल में परिवर्तित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि पशु शवों का त्वरित निस्तारण हो सके और दुर्गंध जैसी समस्याएं न हों. उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी निर्णय में आम जनता की सुविधा और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.

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