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October 17, 2026

घराट

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तमिलनाडु से उत्तराखंड पहुंची भगवान मुरुगन की दिव्य प्रतिमा, हिमालय और दक्षिण भारत की संस्कृति का दिखा संगम

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तमिलनाडु से रुद्रप्रयाग कार्तिक स्वामी मंदिर पहुंची भगवान मुरुगन की दिव्य मूर्ति, कार्तिक स्वामी मंदिर में मूर्ति भेंट कर बना आध्यात्मिक सेतु.

रुद्रप्रयाग: सनातन संस्कृति की अखंडता और भारत की आध्यात्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब तमिलनाडु से भगवान मुरुगन (कार्तिकेय स्वामी) की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा उत्तराखंड के प्राचीन कार्तिक स्वामी मंदिर में भेंट की गई. यह ऐतिहासिक पहल तमिलनाडु के प्रसिद्ध मुरुगन भक्त एवं शोधकर्ता जेएसके गोपी द्वारा की गई. जिसने हिमालय और दक्षिण भारत के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है.

भगवान कार्तिकेय की दिव्य उपासना पर वर्षों से शोध कर रहे जेएसके गोपी ने बताया कि उत्तराखंड स्थित कार्तिक स्वामी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भगवान मुरुगन की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा एक दिव्य केंद्र है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय का हिमालय-2 से तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर तक गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है. इसी आध्यात्मिक अनुभूति और साधना के दौरान प्राप्त प्रेरणा के बाद जेएसके गोपी ने भगवान मुरुगन की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा कार्तिक स्वामी मंदिर को समर्पित की. यह प्रतिमा धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड और तमिलनाडु के सांस्कृतिक मिलन का जीवंत प्रतीक बन गई है.

विशेष आकर्षण का केंद्र बनी यह प्रतिमा भगवान मुरुगन की आशीर्वाद मुद्रा में है. यह स्वरूप करुणा, शांति, कृपा और मानव कल्याण का प्रतीक माना जाता है, जिसने श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया. यह आयोजन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस व्यापक विजन को भी मजबूती देता है, जिसके तहत राज्य सरकार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने और विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है.

मान्यता है कि भगवान मुरुगन ने हिमालय स्थित कार्तिक स्वामी धाम से तमिलनाडु तक आध्यात्मिक यात्रा की थी. अब वर्षों बाद भगवान मुरुगन की प्रतिमा का तमिलनाडु से पुनः उत्तराखंड पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए किसी दिव्य संयोग से कम नहीं माना जा रहा. इस अवसर पर जेएसके गोपी की मुलाकात उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रविशंकर से भी हुई, जो कार्तिक स्वामी मंदिर के विकास और उत्तराखंड-तमिलनाडु सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वहीं कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष विक्रम नेगी ने इस पहल का श्रद्धापूर्वक स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रेरणादायक उदाहरण बताया.

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