टेबल टेनिस चैंपियनशिप में 2 गोल्ड जीतकर छायी सिंड्रेला दास, पर साझा की जीत की खुशी
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जूनियर और युवा राष्ट्रीय टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 के अंडर 17 और अंडर 19 में चमकीं सिंड्रेला दास, संवाददाता रोहित सोनी ने की खास बातचीत
देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित 87वीं इंटर स्टेट जूनियर एंड यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 में पश्चिम बंगाल की टीटी खिलाड़ी सिंड्रेला दास अंडर 17 और अंडर 19 महिला वर्ग में एकल विजेता बनी हैं. जो अब भारतीय टेबल टेनिस टीम के सीनियर समूह में शामिल होकर लंदन में आयोजित होने वाले विश्व चैंपियनशिप खेलेंगी.
सिंड्रेला दास ने ईटीवी भारत पर साझा किया अपना सफर: खास बात ये है कि टेबल टेनिस खिलाड़ी सिंड्रेला दास की अभी उम्र मात्र 16 साल है. वो जब 10 साल की थी, तब से टेबल टेनिस खेल रही हैं. वहीं, भारतीय टेबल टेनिस के सीनियर समूह की खिलाड़ी सिंड्रेला दास ने ईटीवी भारत से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए अपनी जीत की खुशी जाहिर की है.
लंदन में विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप की करेंगी तैयारी: सिंड्रेला दास ने कहा कि अंडर 17 और अंदर 19 एकल महिला वर्ग को जीतकर उन्हें काफी खुशी हुई है. हालांकि, उन्होंने अपने बेस्ट फ्रेंड दिव्यांशी के साथ ही दोनों वर्ग की प्रतियोगिताओं को खेला है. दोनों वर्गों में ही विजेता रही हैं. ऐसे में लंदन में विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप होने जा रहा है, जिसके लिए अब वो तैयारियां करेंगी. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि अगले साल भी दोनों वर्ग की प्रतियोगिताओं को जीतेंगी.
“मैं रोजाना सुबह 4 से 5 घंटे टेबल टेनिस खेलती हूं. जबकि, शाम के समय भी तीन से चार घंटे खेलती हूं. मैं खेल के प्रति सीरियस होने के साथ ही खेल को इंजॉय भी करती हूं. यही वजह है कि मेरा परफॉर्मेंस बेहतर हो रहा है. जब मैं 10 साल की थी, तब से ही प्रोफेशनली टेबल टेनिस खेल रही हूं. उससे पहले टेबल टेनिस खेलने मेरी हॉबी थी. ऐसे में टेबल टेनिस के लिए मेरे एकेडमी ज्वॉइन की. इसके बाद टेबल टेनिस फील्ड में मेरी जर्नी शुरू हो गई.“- सिंड्रेला दास, टेबल टेनिस खिलाड़ी
मेडल जीतने की भूख: सिंड्रेला ने कहा कि जितना टूर्नामेंट वो जीत रही हैं, टेबल टेनिस के प्रति उनका प्यार बढ़ता जा रहा है. क्योंकि, वो अब इंडिया नंबर वन बन गई हैं, लेकिन अभी वो और मेडल जीतने की भूखी है. साथ ही कहा कि उनके माता-पिता का उन पर शुरू से ही भरोसा रहा है. लिहाजा, वो आंख बंद करके भरोसा कर रहे हैं. क्योंकि, पेरेंट्स की वजह से ही वो इतना दूर पहुंच सकी हैं.
“मैं रोजाना सुबह 4 से 5 घंटे टेबल टेनिस खेलती हूं. जबकि, शाम के समय भी तीन से चार घंटे खेलती हूं. मैं खेल के प्रति सीरियस होने के साथ ही खेल को इंजॉय भी करती हूं. यही वजह है कि मेरा परफॉर्मेंस बेहतर हो रहा है. जब मैं 10 साल की थी, तब से ही प्रोफेशनली टेबल टेनिस खेल रही हूं. उससे पहले टेबल टेनिस खेलने मेरी हॉबी थी. ऐसे में टेबल टेनिस के लिए मेरे एकेडमी ज्वॉइन की. इसके बाद टेबल टेनिस फील्ड में मेरी जर्नी शुरू हो गई.“- सिंड्रेला दास, टेबल टेनिस खिलाड़ी
मेडल जीतने की भूख: सिंड्रेला ने कहा कि जितना टूर्नामेंट वो जीत रही हैं, टेबल टेनिस के प्रति उनका प्यार बढ़ता जा रहा है. क्योंकि, वो अब इंडिया नंबर वन बन गई हैं, लेकिन अभी वो और मेडल जीतने की भूखी है. साथ ही कहा कि उनके माता-पिता का उन पर शुरू से ही भरोसा रहा है. लिहाजा, वो आंख बंद करके भरोसा कर रहे हैं. क्योंकि, पेरेंट्स की वजह से ही वो इतना दूर पहुंच सकी हैं.
सिंड्रेला अभी 16 साल की हैं और वो भारतीय टेबल टेनिस की महिला सीनियर टीम में शामिल हो गई हैं. सौम्यदीप रॉय ने बताया कि जब वो 17 साल के थे, तब भारतीय टीम में शामिल हुए थे. हालांकि, सिंड्रेला ने कुछ प्वॉइंट्स की वजह से 87वीं इंटर स्टेट सीनियर टेबल टेनिस चैंपियनशिप की विजेता नहीं बन पाई, नहीं तो आज वो अंडर 17 और अंडर 19 के साथ ही सीनियर्स की भी एकल विजेता खिलाड़ी होती.
“इस बात की खुशी है कि सिंड्रेला ने अंडर 17 और अंडर 19 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए दोनों ही वर्गों में एकल विजेता बनी हैं. वर्तमान समय में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों ही प्लान हैं, जिस पर हम काम कर रहे हैं. ऐसे में मुझे उम्मीद है कि सिंड्रेला देश के लिए मेडल लेकर आएंगीं.“- सौम्यदीप रॉय, कोच
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनका लक्ष्य यही है कि भारत के लिए ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीतकर लाए. क्योंकि, ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल नहीं जीत पाए हैं. जबकि, कॉमनवेल्थ गेम और एशियाई गेम्स में भारत देश मेडल जीत चुका है. ऐसे में इसी लाइन को टारगेट करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस काम को पूरा करेंगे.
