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एक और हादसा, एक बार फिर खतरे में 40 जिंदगियां, ये 17 सावधानियां बरतनी है जरूरी

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उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद इस तरह के निर्माण कार्यों में पूर्व नियोजित आपदा प्रबंधन की तैयारी की खासी जरूरत महसूस होने लगी है। क्योंकि, इस तरह की घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में काफी समय लग जाता है। लिहाजा, कुछ इंतजाम पहले से ऐसे होने चाहिए, जिससे अल्प समय में ही सुरंग में फंसे श्रमिकों व अन्य स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
सुरंग निर्माण के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की परियोजना में आपदा प्रबंधन के लिहाज से 17 तरह के उपाय पहले से किए जाने की जरूरत है। इसमें सबसे अहम यह है कि सुरंग में काम करने वाले श्रमिकों व अन्य स्टाफ को आपदा की स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही कम से कम एक ऐसे स्टाफ की तैनाती की जाए, जो आपदा के दौरान बचाव के विभिन्न उपाय करने में दक्ष हो। क्योंकि, इस तरह की घटना में निकासी में लंबा समय लग सकता है और इस अवधि में जीवन को बचाए रखना ही सबसे अहम बात है।

सुरंग के निर्माण से पहले हो ये व्यवस्था
इसके अलावा सुरंग के भीतर दृश्यता और ऑक्सीजन की समुचित उपलब्धता बनाए रखने के लिए पहले से पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। हमेशा श्रमिकों और तकनीकी स्टाफ को आसपास के क्षेत्र व उसमें नजर आ रहे बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत है। निर्माण के दौरान किसी भी तरह का संदेह हो तो तत्काल पूछने की प्रवृति श्रमिकों में होनी चाहिए। मशीनों और उपकरणों की पुख्ता जांच समय-समय पर जरूरी है और भारी मशीनों के संचालन के प्रति विशेष सावधानी बरतने की भी जरूरत होती है।

यह एहतियात भी जरूरी
कार्यस्थल पर पानी की भरपूर उपलब्धता
उचित वेंटिलेशन के प्रयास
सुरंग का फर्श जहां तक हो साफ रखा जाए
श्रमिक व अन्य स्टाफ के बीच निरंतर संवाद
एक उचित परिधि स्थापित की जाए
बिजली के उपकरणों और तारों का रखरखाव बेहतर हो
अलग-अलग कार्य क्षेत्र स्थापित किए जाएं

सुरक्षा उपकरण पहनकर ही काम किया जाए
वर्ष 2005 की घटना से सीख लेना जरूरी सुरंग निर्माण के जानकार शरद रावत ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन की घटना के दौरान स्टील के मोटे पाइप की उपलब्धता तत्काल की जानी चाहिए थी। क्योंकि, सुरंग के भूस्खलन से बाधित होने की घटना उत्तराखंड के लिए नई नहीं है। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2005 में उत्तरकाशी की मनेरी भाली जलविद्युत परियोजना की सुरंग भूस्खलन से बाधित हुई थी, तब भी श्रमिक भीतर फंस गए थे।

आपदा प्रबंधन के किए जाने चाहिए उपाय
हालांकि, स्टील के मोटे पाइप के माध्यम से 20 श्रमिकों को 14 घंटे के भीतर ही बाहर निकाल लिया गया था। लिहाजा, सुरंग निर्माण के दौरान भूस्खलन के लिहाज से आपदा प्रबंधन के पूर्व इंतजाम किए जाने जरूरी हैं। यदि स्टील के मोटे पाइप की उपलब्धता रहती तो संभवतः श्रमिक सोमवार तक सकुशल बाहर निकाल लिए जाते।

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